Rui Chor Cotton Thief Latest Hindi Story to read free

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राजा सुमेर सिंह बहुत ही दयालु और न्यायप्रिय राजा थे वे बहुत से गरीब जुलाहों को अपनी ओर से सस्ते दामों पर रूई देते थे। उस रूई से सूत कातकर जुलाहे कपड़ा बनाते और उसे बाजार में बेचकर अपना जीवनयापन करते थे। एक बार गुप्त रूप से जब राजा ने छापा मारा तो पता चला कि उन्हें उतनी कपास नहीं मिलती जितनी के लिए वह कीमत चुकाते हैं। दूसरे महीने में भी ऐसा ही देखा गया तो राजा सुमेर सिंह को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने घोषणा की कि इस योजना से राजकोष को भारी नुकसान हो रहा है। इसलिए वे यह योजना बंद कर रहे हैं। सुनकर गरीब जुलाहों का दिल बैठने लगा क्योंकि राजा के इस योजना को बंद कर देने से वे कुछ भी नहीं कमा पाते और भूखों मरने की नौबत आ जाती। Rui Chor Cotton Thief Latest Hindi Story to read free

उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वे इस मुश्किल घड़ी में क्या करें। अंत में उन्होंने राजा सुमेर सिंह के परम सलाहकार, मित्र और गरीबों के मसीहा पंडित लखन के पास जाने का मन बनाया। उन्हें उम्मीद थी कि पंडित लखन राजा को समझा सकते हैं कि वे गरीबों के उद्धार के लिए चालू की गई इस योजना को बंद ना  करें वरना वे बेरोजगार हो जाएंगे।

पडित लखन ने उनकी दुख भरी कहानी सुनी और राजा सुमेर सिंह के पास जाकर बोले जहाँपनाह! आपकी इस योजना से कई गरीब जुलाहों के पेट पलते हैं। इसलिए कृपा करके आप इसे बंद न करें। मैं आपसे वादा करता हूँ कि मैं बहुत जल्द पाता लगाता हु कि कपास कौन चुराता है।” राजा सुमेर सिंह ने उत्तर दिया, “ठीक है, पंडित लखन, यदि तुम दो दिनों के भितर  अपराधी को पकड़कर मेरे सामने पेश कर दोगे तो मैं इस योजना को रद्द नहीं करूँगा। यदि तुम इसमें असफल रहे तो योजना को बंद करने के अलावा मेरे पास ओर  कोई विकल्प नहीं रहेगा।” वास्तव में रूई चुराने वाला कोई और नहीं मुख्य दलाल ही था। उसका काम था खेतों से कपास लाकर राजा के गोदाम में जमा करना। पर वह बेईमानी करता था। वह कुछ कपास राजा के गोदाम में जमा करता और बाकी कपास बाजार में ऊँचे दामों में बेच देता था। पंडित लखन ने चोर को पकड़ने के लिए एक योजना बनाई। उन्होंने कपास के सभी दलालों को राजदरबार में बुलाया। जब सभी दलाल दरबार में पहुंच गए तो पंडित लखन बोले, “आप सब जान गए होगे कि राजकोष को इस  उद्योग से भारी घाटा हो रहा है। दलाल कपास चुराकर उसे बाजार में ऊँचे दामों में बेचता है। इस तरह वह न केवल राजा के साथ ठगी कर रहा है, अपितु दूसरे जुलाहों के साथ भी बेईमानी कर रहा है। इस समय भी उसकी पगड़ी में कपास के रेशे हैं। इसलिए

सभी पगड़ी यों को उतारकर उनकी पड़ताल की जाएगी और जिसकी पगड़ी में कपास निकलेगी वही चोर होगा।” वास्तव में पंडित लखन ने यह मनगढ़ंत कहानी इसलिए सुनाई थी ताकि वे असली चोर की प्रतिक्रिया देख सकें। सभी दलाल एक-दूसरे को उत्सुकता से देख रहे थे वे देखना चाहते थे कि किसकी पगड़ी से कपास निकलती है। जबकि कपास चोर दलाल बुरी तरह डरा हुआ था और उसका हाथ अपनी पगड़ी पर था। पंडित लखन ने उसके चेह उड़ा रंग देखकर उसे पहचान लिया। उन्होंने तुरंत सैनिकों को आदेश दिया. ‘इस दलाल को पकड़ लो यही चोर है।” काफी देर तक पीटे जाने के बाद उस दलाल ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इस प्रकार पंडित लखन ने रूई चोर को पकड़कर जहाँ गरीब जुलाहों की मदद की, वहीं राजकोष में होने वाले घाटे को बचाकर राजा का भी विश्वास जीत लिया।

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Author: admin

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