Real friendship best hindi short story for kids

Real friendship best hindi short story for kids

Real friendship best hindi short story for kids सच्ची दोस्ती

गर्मी की छुट्टियां शुरू हो गई थीं। रचित को तो जैसे मुंहमांगी मुराद ही मिल गई। अब वह पूरे दिन खेल सकता था। अब पापा या दीदी की आवाज नहीं आएगी कि ‘रचित यह पढ़े…वह याद करो।’ अब रचित का अधिकतर समय क्रिकेट या वीडियो गेम्स खेलने में बीतने लगा।

रचित चौथी कक्षा का छात्र है और अपनी कक्षा के सबसे अच्छे विद्यार्थियों में माना जाता है। रचित के पापा उसे हमेशा समझाते हैं कि जीवन में खेल और पढ़ाई दोनों ही महत्त्वपूर्ण हैं, किंतु पढ़ाई समाप्त करने के बाद ही खेलना उचित है। रचित की दादी के इम्तिहान अभी खत्म नहीं हुए थे जब वह जोर जोर से पढ़ाई कर रही हो तो, तो रचित उन्हें मुंह चिढ़ाकर भाग जाता। उस दिन दोपहर से ही कॉलोनी के बच्चों का क्रिकेट का खेल खूब जम रहा था।

 रचित ने यह मारा चौका और गेंद गई पड़ोस के घर में। रचित की टीम जोर जोर से तालियां बजाने लगी। समीर की टीम का मुंह लटक गया। अगली बार गेंद प्रांशु ने फेंकी। यह आई सर्र से गेंद और रचित ने पूरी ताकत से बल्ला घुमाया और यह गया छक्का । इस बार तो रचित की टीम खुशी से पागल हो गई। रचित की टीम की खुशी समीर की टीम को हजम नहीं हुई। समीर ने गुस्से में तीनों विकेट उखाड़कर फेंक दिए। खेल बीच में ही रोक दिया गया था। दोनों टीमें लड़ पड़ी थीं। जब कप्तान ही लड़ पड़े, तो टीम की क्या बिसात। अगले दिन दीदी ने देखा कि शाम के चार बजे हैं और रचित महाशय घर में बैठे हैं। वह सोच में पड़ गई। यह तो ऐसी ही बात थी कि सूरज पश्चिम से उग आया हो। आखिर दीदी ने रचित से पूछ ही लिया, “क्या बात है रचित, आज तुम खेलने नहीं जा रहे?” “नहीं दीदी। ” रचित ने तुनककर जवाब दिया- ” मेरी समीर से लड़ाई हो गई है।” ‘लेकिन उचित, तुम्हें छोटी-छोटी बातों का बुरा नहीं मानना चाहिए। यह तो दोस्ती का पहला नियम है। फिर समीर तो तुम्हारा कितना प्यारा और पुराना दोस्त है। दीदी रचित को समझा रही थीं। नहीं चाहिए मुझे ऐसा दोस्त और ऐसी दोस्ती।” रचित ने मुंह चिचकाते हुए कहा। आखिर दीदी हारकर अपनी पढ़ाई करने लगीं।

Real friendship best hindi short story for kids

अगले दिन सुबह रचित अपना मनपसंद नाश्ता कर ही रहा था कि अचानक बाहर से किसी जानवर के चीखने की आवाज आई। यह आवाज इतनी करुण थी कि रचित अपना नाश्ता अधूरा छोड़कर बाहर आ गया। वह सड़क का दृश्य देखकर सहम गया। चार-पांच लोग कॉलोनी में घूमने वाले आवारा सूअर को पकड़ने की कोशिश कर रहे थे उनके पास मोटे मोटे बल्लम व डंडे थे और वे सूअर को काटकर बांधने की कोशिश कर रहे थे। सूअर पूरी शक्ति लगाकर चीख रहा था। शायद वह सहायता की गुहार लगा रहा था। सूअर की करुण पुकार रचित के बाल-मन को झकझोर रही थी।

तभी उसने देखा कि एक गाय अपने सींगों से उन चार-पांच लोगों को भगाने का प्रयास कर रही है। वह बार-बार हिम्मत कर उन लोगों के पास आती और अपनी जान की परवाह किए बगैर ही सूअर को बचाने का प्रयास करती। अव तक वे लोग सूअर को अच्छी तरह बांध चुके थे और उसे नगरपालिका की गाड़ी में चढ़ा रहे थे। रचित ने देखा कि गाय रंभाती हुई गाड़ी के पीछे भाग रही थी है।

रचित को लगा कि वह रो पड़ेगा। उसने दीदी से सूअर को उन आदमियों से बचाने का आग्रह किया।

 दीदी हंसकर बोलीं-“ये लोग नगरपालिका के कर्मचारी हैं, ये आवारा जानवरों को इसलिए पकड़ते हैं जिससे ये शहर को गंदा और प्रदूषित न करें। इन लोगों का तो काम ही यही है।”

रचित के आंसू थम गए थे। वह देर तक सड़क को देखता रहा, जहां उसने सच्ची दोस्ती की अनूठी मिसाल देखी थी। एक जानवर का दूसरे जानवर के प्रति इतना प्यार। अपनी जान की परवाह किए बगैर अपने दोस्त को बचाने का महान त्याग देखा था। रचित को लगा उसकी दीदी ठीक कह रही थी। सच्ची दोस्तो की नाव छोटी-मोटी दरारों से नहीं टूटती है।

‘दीदी, मैं समीर के घर जा रहा हूं। उसे फिर से अपना पक्का दोस्त बनाने।” रचित के मुंह पर मुस्कान थी। उसकी दोदी ने उसे गले से लगा लिया।

रेखा कौशिक

Mitvaa

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